Neeraj Chopra javelin thrower -Neeraj Chopra is associated with which sports 2021

टोक्यो ओलंपिक में हिंदुस्तान को पहला गोल्ड मेडल दिलाने वाले नीरज चोपड़ा पर पूरे देश को ना चाहे ओलंपिक के इतिहास में अब तक भारत को क्यों गई। लांचर पदक मिले थे लेकिन अब उन्होंने दसवां गोल्ड मेडल दिला दिया है और दोस्तों अभिनव बिंद्रा के बाद से वे दूसरे ऐसे भारतीय हैं जिन्होंने एकल स्पर्धा में स्वर्ण पदक दिलाया है। नीरज ने भाला फेंक ही बैंक में इतिहास रचा और एथलेटिक्स में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने अब तो वैसे तो देश में क्रिकेट के अलावा अन्य खिलाड़ियों को अपनी पहचान नहीं मिलती। जितनी की बिल्ली चाहिए लेकिन नीरज चोपड़ा केवल 23 साल की उम्र में ही इतिहास रचते सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन जाए तो चलिए दोस्तों हम जानते हैं |

Neeraj Chopra javelin thrower

आखिर कौन है Neeraj Chopra दोस्तों 24 दिसंबर 1997, हरियाणा के खानदान गांव में नीरज चोपड़ा का जन्म हुआ था। नीरज चोपड़ा गरीब किसान परिवार से आते हैं और 11 साल की उम्र में नीरज मोटापे का शिकार हो गए थे। उनका वजन बढ़े।घरवालों ने मोटापे को कम करने के लिए नीरज को खेलकूद का सहारा लेने की सलाह दी जिसके बाद से वह वजन कम करने के लिए पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में जाने लगे और दोस्तों एक आम भारतीय लड़के की तरह उनकी पहली पसंद भी क्रिकेट हुआ करती थी लेकिन अब पेटीएम में जैवलिन क्योंकि प्रेक्टिस करने वाले खिलाड़ियों को देखकर उनके मन में आया कि मैं तो और भी ज्यादा दूर फेंक सकता हूं और दोस्तों जल्दी से नीरज चोपड़ा के मन से क्रिकेट आउट हो गया और जैकलिन सॉन्ग ने एंट्री और फिर सबसे पहले 2012 में एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद से नहीं रहने 2016 में पोलैंड में हुए आईएएएफ वर्ल्ड अंडरस्टैंड चैंपियनशिप में 86.48 मीटर दूर भाला फेंककर गोल्ड मेडल जीता था और इसी उपलब्धि की वजह से उन्हें जूनियर कमीशंड ऑफिसर के 4 पद मुक्ति मिल गई थी।

Neeraj Chopra is associated with which sports 2021

अब आर्मी से जॉब मिलने के बाद से ही नहीं राजनीति इंटरव्यू में कहा था कि मेरे पिता है किसान हैं और माइक हाउसवाइफ और मैं जॉइंट फैमिली में रहता हूं और मेरे परिवार में।किसी की भी सरकारी नौकरी नहीं है इसीलिए सब मेरे लिए कोई है। उन्होंने कहा था कि आपने अपनी ट्रेनिंग जारी रखने के साथ-साथ अपने परिवार की आर्थिक मदद नहीं कर सकता हूं। हालांकि जॉब पाने के बाद भी नीरज ने अपनी प्रेक्टिस नहीं छोड़ी और आगे चल कर दो हजार अट्ठारह में इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में उन्होंने अट्ठासी रखूंगा। 06 मीटर का सो करके गोल्ड मेडल जीता लेकिन दोस्तों दो हजार अट्ठारह में एशियन खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार परफॉर्मेंस के बाद से नीरज कंधे की चोट के शिकार हो गए और इस वजह से वह काफी वक्त तक खेल से दूर रहे थे। हालांकि दोस्तों सही समय पर वापसी करते हुए नीरज चोपड़ा ने इतिहास रच दिया और 87.58 मीटर का शो करके उन्होंने भारत को पहला गोल्ड मेडल दिला दिया और दोस्तों इस तरह से गरीब किसान परिवार में जन्मे नीरज चोपड़ा, आज हम सभी के लिए इंस्पिरेशन बन चुके हैं।

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